Feb 02, 2026

जीरो एफआईआर से जीरो सबूत तक: विदेशी छात्र दुष्कर्म केस में देहरादून कोर्ट का फैसला

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देहरादून में एक निजी विश्वविद्यालय की विदेशी छात्रा से दुष्कर्म के सनसनीखेज मामले में आरोपी विदेशी छात्र को अदालत ने शुक्रवार को बरी कर दिया। मामला अक्तूबर-2024 में दिल्ली के कश्मीरी गेट थाने में जीरो एफआईआर के तहत दर्ज हुआ था, जिसे विवेचना के लिए देहरादून पुलिस के पास स्थानांतरित किया गया था। ये अलग बात है कि देहरादून आकर न्याय की उम्मीद ने कागजों में ही दम तोड़ दिया। जीरो एफआईआर की जांच भी जीरो साबित हुई।

अदालत ने आरोपी को बरी करने के फैसले में क्लेमेंटटाउन थाने के तत्कालीन जांच अधिकारी के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की। कहा, जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर संजीत कुमार ने इस मामले में साइंटिफिक एविडेंस को सिरे से नजरअंदाज किया। छात्रा का आरोप था कि उसके साथ सोते समय दुष्कर्म किया गया। ऐसे में सामान्य प्रक्रिया के तहत पुलिस को उसके बिस्तर की चादर और वहां मौजूद कपड़ों को फाॅरेंसिक जांच के लिए जब्त करना था,लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनी शुक्ला की अदालत ने दक्षिण सूडान के छात्र मूसा उर्फ मोजा मोजिज लाडू जेम्स को सभी आरोपों से दोषमुक्त किया। दक्षिण अफ्रीका की रहने वाली पीड़ित छात्रा देहरादून से ग्रेजुएशन कर रही थी। उसने पुलिस को बयान दिया था कि 29 अक्तूबर 2024 की रात क्लेमेंटटाउन थाना क्षेत्र में उनके समूह की फेयरवेल पार्टी थी,जिसमें उसके संस्थान के कई छात्र व छात्राएं थीं। पार्टी के बाद वह सो रही थी, तभी आरोपी मूसा ने बेसुध अवस्था में दुष्कर्म किया। अदालत में छात्रा ने जिरह के दौरान माना कि उसने और उसके सभी साथियों ने पार्टी में ड्रिंक की थी। नशे में होने के कारण उसे किसने और कब टच किया,उसे ठीक से याद नहीं। पार्टी में मौजूद अन्य विदेशी छात्रों ने गवाही दी कि आरोपी और पीड़िता अलग-अलग कमरों में सोए थे। एक छात्र ने गवाही दी कि उसे रात में पीड़िता के चिल्लाने की आवाज आई थी,लेकिन शायद वह नींद में कोई बुरा सपना देखकर उठी थी। वह उसके कमरे में गए तो आरोपी मूसा वहां मौजूद नहीं था।