Feb 02, 2026

स्मार्ट ग्रिड निवेश से पहाड़ों से मैदानों तक बिजली ट्रांसमिशन होगा आसान

post-img

केंद्रीय बजट में नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, पंप्ड स्टोरेज, स्मार्ट ग्रिड, ट्रांसमिशन नेटवर्क और ग्रीन हाइड्रोजन पर किए गए बड़े प्रविधान उत्तराखंड जैसे ऊर्जा प्रधान राज्य के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र में उत्तराखंड की चुनौती हमेशा ट्रांसमिशन और स्टोरेज रही है, न कि उत्पादन। सीमित हाई-कैपेसिटी ट्रांसमिशन लाइनों के कारण कई हाइड्रो परियोजनाएं अपनी पूरी क्षमता से बिजली नहीं भेज पा रही थीं। बजट में ग्रिड-इंटीग्रेशन, स्मार्ट ग्रिड और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम पर जोर से इस समस्या का समाधान होता दिख रहा है। उत्पादित बिजली के भंडारण से ट्रांसमिशन की अस्थिरता कम होगी, पीक डिमांड के समय आपूर्ति बेहतर होगी और आपदा या खराब मौसम के दौरान ग्रिड अधिक मजबूत रहेगा। इससे राज्य के ऊर्जा सेक्टर की कई मुश्किलें खत्म हो जाएंगी।

उत्तराखंड की स्थापित जलविद्युत क्षमता लगभग 2,300 मेगावाट से अधिक है। पिछले कुछ वर्षों में सोलर ऊर्जा पर जोर बढ़ा है। राज्य में करीब 200 मेगावाट सोलर क्षमता ग्रिड से जुड़ चुकी है, जबकि हजारों घरों और सरकारी भवनों पर रूफटाप सोलर लगाया जा चुका है। इस पृष्ठभूमि में केंद्रीय बजट का नवीकरणीय ऊर्जा व ऊर्जा संग्रहण पर फोकस उत्तराखंड के लिए लाभकारी है। केंद्रीय बजट में नवीकरणीय ऊर्जा के लिए लगभग 32,915 करोड़, प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के लिए 22,000 करोड़, बैटरी-स्टोरेज से जुड़ी पूंजीगत वस्तुओं पर सीमा-शुल्क की छूट, ग्रिड सुदृढ़ीकरण और ऊर्जा भंडारण पर विशेष जोर दिया गया है। ये सभी कदम उत्तराखंड की ऊर्जा अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाले हैं। जानकारों का कहना है कि यह बजट राज्य को पावर प्रोड्यूसर से आगे बढ़ाकर पावर सप्लायर हब बनाने के लिए आधार तैयार करेगा। राज्य ने हाल ही में ग्रीन हाइड्रोजन नीति भी लागू की है, जिसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, उद्योगों में हाइड्रोजन उपयोग और भविष्य के निवेश को आकर्षित करना है। केंद्रीय बजट में ग्रीन एनर्जी, बैटरी स्टोरेज और ट्रांसमिशन पर फोकस दिए जाने से राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन आधारित उद्योग, हरित औद्योगिक कारिडोर और स्वच्छ ईंधन आधारित परिवहन को बढ़ावा मिलने की संभावना है। बजट में ऊर्जा भंडारण को बढ़ावा देने से टिहरी पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट को भी नया बल मिल सकता है, क्योंकि यह नवीकरणीय ऊर्जा के लिए बैकअप सिस्टम का काम कर सकता है। राज्य की लंबित परियोजनाओं लखवार-व्यासी जलविद्युत परियोजना, किशाऊ बांध परियोजना को भी बजट से गति मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, श्रीनगर-कर्णप्रयाग-जोशीमठ ट्रांसमिशन कारिडोर और कुमाऊं क्षेत्र (पिथौरागढ़, बागेश्वर) में ग्रिड सुदृढ़ीकरण जैसी योजनाओं को भी बजट से अप्रत्यक्ष लाभ की संभावना है। ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत होता है, तो पहाड़ों में उत्पादित बिजली मैदानों तक आसानी से पहुंचेगी, इससे वितरण घाटा घटेगा और राज्य को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा।