राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में तकनीकी साक्ष्यों की तलाश में एसआईटी

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अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) के सामने सबसे बड़ी चुनौती ठोस और तकनीकी साक्ष्य जुटाने की बन गई है। जांच के शुरुआती छह दिनों में सामने आया है कि मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों का बैकअप केवल 45 दिनों तक ही सुरक्षित रखा जाता है। इसके बाद पुरानी फुटेज स्वतः डिलीट हो जाती है। ऐसे में कथित चोरी की शुरुआत कब हुई और यह कितने समय तक चलती रही, इसका सटीक पता लगाना जांच एजेंसियों के लिए मुश्किल हो गया है। सूत्रों के अनुसार एसआईटी की जांच में सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ किए जाने के संकेत भी मिले हैं। इस खुलासे के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। जांच टीम अब फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से अधिक से अधिक पुरानी डिजिटल सामग्री और तकनीकी साक्ष्यों को रिकवर करने का प्रयास कर रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि कई महीने पुरानी फुटेज उपलब्ध न होने के कारण यह साबित करना कठिन हो गया है कि रिकॉर्डिंग के साथ कब और किस स्तर पर छेड़छाड़ की गई। हालांकि यदि पिछले डेढ़ महीने के भीतर फुटेज में किसी प्रकार का बदलाव या डिलीशन किया गया है तो उसके तकनीकी प्रमाण सामने आने की संभावना बनी हुई है। एसआईटी फिलहाल मंदिर से जुड़े कर्मचारियों, पदाधिकारियों और पहले से गिरफ्तार या संदिग्ध व्यक्तियों के बयानों का आपस में मिलान कर रही है। पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने आए हैं, जिन्हें जांच का अहम आधार माना जा रहा है।

सीमित डिजिटल साक्ष्यों के कारण अब जांच काफी हद तक गवाहों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों पर निर्भर होती जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इसी वजह से जांच लंबी और बहुस्तरीय हो सकती है। इस बीच शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुंचे और मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशवासियों ने 500 वर्षों तक इंतजार किया है और इस मामले में गठित एसआईटी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रस्ट के अनुरोध पर ही एसआईटी का गठन किया गया है और जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी के पास मामले से जुड़ा कोई साक्ष्य या प्रमाण है तो वह उसे एसआईटी को उपलब्ध कराए। उन्होंने अनर्गल बयानबाजी से बचने की भी सलाह दी और कहा कि जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग अयोध्या की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से दुष्प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एसआईटी की जांच पूरी होने तक सभी को धैर्य रखना चाहिए और अनावश्यक रूप से अयोध्या धाम की छवि को प्रभावित करने वाले बयान देने से बचना चाहिए। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा तथा दोषियों को कानून के अनुसार सख्त सजा मिलेगी। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर पूरे देश की नजरें एसआईटी जांच पर टिकी हुई हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में फोरेंसिक रिपोर्ट, तकनीकी विश्लेषण और गवाहों के बयान इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।